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मार्केट ऑर्डर और लिमिट ऑर्डर में अंतर: क्रिप्टो ट्रेड कैसे पूरा होता है

मार्केट ऑर्डर उपलब्ध खरीद या बिक्री प्रस्तावों से तुरंत ट्रेड करने की कोशिश करता है। लिमिट ऑर्डर के साथ कीमत की एक शर्त भी जुड़ी होती है। इसलिए फर्क केवल तेज़ या धीमे ऑर्डर का नहीं है: सवाल यह भी है कि कितनी मात्रा, किस कीमत पर पूरी हो सकती है। यह गाइड एक्सचेंज के ऑर्डर समझने के लिए है; किसी कॉइन को खरीदने, बेचने या कोई निवेश रणनीति अपनाने की सलाह नहीं है।

SharkRule · दस्तावेज़ जाँच की तारीख

Market और Limit का सीधा मतलब

लिमिट खरीद ऑर्डर में तय कीमत वह अधिकतम दर है जो आप एक इकाई के लिए चुकाने की अनुमति देते हैं। लिमिट बिक्री ऑर्डर में वह न्यूनतम दर है जिस पर बेचने की अनुमति होती है। बेहतर कीमत मिल सकती है, लेकिन पूरा ऑर्डर भरना तय नहीं है। मार्केट ऑर्डर में आपकी चुनी हुई ऐसी लिमिट कीमत नहीं होती; एक्सचेंज के नियम और उपलब्ध दूसरे ऑर्डर उसके परिणाम को तय करते हैं।

दोनों ऑर्डर में क्या तय होता है?
सवालमार्केट ऑर्डरलिमिट ऑर्डर
आप क्या दर्ज करते हैं?खरीद या बिक्री और मात्रा या कुल रकम; एक्सचेंज के अनुसारखरीद या बिक्री, मात्रा और कीमत की सीमा
ट्रेड किस कीमत पर होगा?निष्पादन के समय उपलब्ध दूसरे ऑर्डर की कीमत परतय सीमा या उससे बेहतर कीमत पर
क्या पूरी मात्रा मिलना तय है?उपलब्ध मात्रा और एक्सचेंज की पाबंदियों पर निर्भर हैनहीं; कुछ हिस्सा या पूरा ऑर्डर अधूरा रह सकता है
क्या पिछली ट्रेड कीमत पक्की है?नहींनहीं; आपकी सीमा एक शर्त है, पूरा होने का वादा नहीं

ऑर्डर बुक में कीमत के साथ मात्रा भी देखें

ऑर्डर बुक बताती है कि लोग किस कीमत पर कितनी मात्रा खरीदना या बेचना चाहते हैं। सबसे ऊँचा खरीद प्रस्ताव best bid और सबसे कम बिक्री प्रस्ताव best ask कहलाता है। तुरंत खरीदने वाला आम तौर पर बिक्री प्रस्तावों से और तुरंत बेचने वाला खरीद प्रस्तावों से ट्रेड करता है। स्क्रीन पर दिखने वाली पिछली ट्रेड कीमत पहले हो चुकी एक लेनदेन की जानकारी है।

मान लें कि सबसे ऊँचा खरीद प्रस्ताव 99.80 और सबसे कम बिक्री प्रस्ताव 100.00 है। इनके बीच 0.20 का अंतर स्प्रेड है। लेकिन 100.00 पर बहुत कम मात्रा उपलब्ध हो तो बड़ा खरीद ऑर्डर उसी दर पर पूरा नहीं होगा। केवल कीमत देखकर पूरे ऑर्डर की लागत निकालना इसलिए गलत हो सकता है। कीमत, उपलब्ध मात्रा और डेटा का समय साथ पढ़ें।

एक काल्पनिक ऑर्डर बुक से लागत निकालें

नीचे सभी बिक्री प्रस्ताव काल्पनिक हैं। कीमतें किसी वास्तविक कॉइन या रुपये की दर नहीं हैं; वे एक काल्पनिक मुद्रा की इकाइयाँ हैं। पहले फीस को अलग रखते हैं। यह भी मानते हैं कि गणना के दौरान कोई दूसरा ऑर्डर नहीं आता और दिखाई गई मात्रा उपलब्ध रहती है।

काल्पनिक बिक्री प्रस्ताव
प्रति इकाई कीमतउपलब्ध मात्राउस मात्रा की लागत
100.000.440.00
101.000.660.60
103.000.551.50

इसी बुक में तीन ऑर्डर के अलग परिणाम

1 इकाई का मार्केट खरीद ऑर्डर पहले 0.4 इकाई 100 पर और फिर 0.6 इकाई 101 पर लेगा। इस उदाहरण में कुल लागत 0.4 × 100 + 0.6 × 101 = 100.60 है। कुल मात्रा 1 होने से औसत निष्पादन कीमत भी 100.60 है। शुरुआत की सबसे कम बिक्री कीमत 100 को तुलना का आधार बनाएँ तो यह 0.60, यानी 0.6% अधिक है। यह केवल बताई गई मान्यताओं का परिणाम है, लाइव कीमत का अनुमान नहीं।

1 इकाई का लिमिट खरीद ऑर्डर, जिसकी सीमा 100 है, दिखाई गई बुक से अधिकतम 0.4 इकाई ही ले सकता है। बाकी 0.6 इकाई को 101 पर खरीदने की अनुमति नहीं है। बची मात्रा इंतज़ार करेगी या चुनी गई वैधता की शर्त के अनुसार रद्द या समाप्त होगी। लाइव स्थिति में कोई दूसरा ऑर्डर पहले आ जाए तो 0.4 इकाई मिलना भी तय नहीं है।

अगर उसी 1 इकाई के खरीद ऑर्डर की लिमिट 102 हो, तो यह उदाहरण के पहले दो प्रस्ताव तुरंत ले सकता है। कुल लागत फिर भी 100.60 होगी, 102 नहीं। सीमा यह बताती है कि कितनी ऊँची कीमत की अनुमति है; वह उतनी ही कीमत चुकाने की बाध्यता नहीं बनाती। ऐसा लिमिट ऑर्डर मौजूदा प्रस्तावों से तुरंत ट्रेड करके टेकर भी बन सकता है।

स्प्रेड, स्लिपेज और फीस को एक संख्या न मानें

स्प्रेड सबसे अच्छे खरीद और बिक्री प्रस्तावों का अंतर है। स्लिपेज वास्तविक निष्पादन कीमत और पहले चुनी गई तुलना कीमत का अंतर है। तुलना कीमत ऑर्डर भेजने से पहले का best ask हो सकती है, लेकिन उसे साफ लिखना चाहिए। ट्रेडिंग फीस एक्सचेंज की अलग लागत है। इन तीनों को मिलाने पर पता नहीं चलता कि अंतिम रकम क्यों बदली।

उदाहरण का 100.60 फीस से पहले का खर्च है। वास्तविक फीस और वह किस एसेट में कटेगी, यह एक्सचेंज, उत्पाद, खाते की शर्तों और निष्पादन पर निर्भर हो सकता है। मौजूदा शुल्क सूची और वास्तविक ट्रेड रिकॉर्ड देखें। अगर शुल्क खरीदे गए एसेट से कटता है तो पूरी हुई मात्रा और इस्तेमाल योग्य बैलेंस अलग दिख सकते हैं। यहाँ कोई काल्पनिक दर वास्तविक शुल्क की तरह नहीं लगाई गई है।

100 की लिमिट प्रति इकाई कीमत को बाँधती है; वह अपने आप फीस सहित कुल खर्च की सीमा नहीं बनती। मात्रा के अनुमत चरण, कीमत के चरण और न्यूनतम ऑर्डर मूल्य भी जाँचें। न्यूनतम मूल्य पूरा करने के लिए बॉट मात्रा बढ़ाए तो नया ऑर्डर तय बजट में रहना चाहिए। इसे बिना जाँच की तकनीकी गोलाई न समझें।

आंशिक निष्पादन और कैंसलेशन को अलग समझें

ऑर्डर स्वीकार होना और पूरा होना अलग अवस्थाएँ हैं। यदि 1 इकाई में से 0.4 पूरी हुई है, तो 0.4 खरीदी गई मात्रा और 0.6 बाकी मात्रा अलग दर्ज करें। बचा ऑर्डर कैंसल करने से पहले से खरीदी गई 0.4 इकाई वापस नहीं होती। खुले ऑर्डर में रोकी गई रकम को नए ऑर्डर के लिए फिर उपलब्ध मानना भी गलत है।

कैंसलेशन का अनुरोध रास्ते में हो तो इस बीच और मात्रा पूरी हो सकती है। इसलिए केवल ‘कैंसल अनुरोध भेजा’ देखकर उसी मात्रा का नया ऑर्डर न बनाएँ। पहले एक्सचेंज का अंतिम स्टेटस, पूरी हुई मात्रा और शेष मात्रा मिलाएँ। यह फर्क खास तौर पर तेज़ी से बदलती ऑर्डर बुक में मायने रखता है।

कुछ एक्सचेंज अतिरिक्त शर्तें देते हैं। IOC तुरंत संभव हिस्सा पूरा करके बाकी समाप्त करता है। FOK में तुरंत पूरी मात्रा मिल सके तभी ऑर्डर आगे बढ़ता है। Post-only का उद्देश्य नए ऑर्डर को मौजूदा दूसरे ऑर्डर से तुरंत मैच होने से रोकना है। इन विकल्पों की उपलब्धता और व्यवहार एक्सचेंज व ऑर्डर प्रकार के अनुसार जाँचें; नाम समान होने से हर जगह पूरा व्यवहार समान मानना ठीक नहीं।

ट्रेडिंग बॉट के नियम में क्या लिखना चाहिए?

‘कीमत 100 होते ही खरीदो’ अधूरी परिभाषा है। कौन सी कीमत—पिछली ट्रेड, सबसे अच्छा बिक्री प्रस्ताव या कुछ और? डेटा कितना पुराना हो सकता है? आधा ऑर्डर भरने पर अगला कदम क्या होगा? नीचे की सूची सॉफ़्टवेयर के व्यवहार को स्पष्ट करने के लिए है, किसी लाभदायक ट्रेड की पहचान के लिए नहीं।

  1. एक्सचेंज उत्पाद, ट्रेडिंग जोड़ी, खरीद या बिक्री की दिशा और डेटा स्रोत लिखें।
  2. मात्रा या कुल रकम, प्रति इकाई कीमत की सीमा और फीस सहित खर्च की सीमा अलग तय करें।
  3. ऑर्डर की वैधता और बची मात्रा का व्यवहार तय करें।
  4. पहले से पूरी मात्रा और खुले ऑर्डर में रोकी रकम दोनों को बजट में गिनें।
  5. जवाब न मिलने पर पहले ऑर्डर स्टेटस और ट्रेड रिकॉर्ड देखें। टाइमआउट का मतलब हमेशा असफल ऑर्डर नहीं होता।
  6. बॉट दोबारा शुरू होने पर पुराने खुले ऑर्डर और बैलेंस मिलाए बिना नए ऑर्डर चालू न करे।

बिना असली ऑर्डर भेजे दो अभ्यास करें

पहले ऊपर की बुक को कागज़ या स्प्रेडशीट पर लिखें और तीनों ऑर्डर के लिए कुल कीमत तथा बची मात्रा निकालें। फिर 100 की दर पर उपलब्ध 0.4 इकाई हटा दें और दोबारा गणना करें। इससे समझ आता है कि पहले दिखी कीमत बाद के निष्पादन का वादा क्यों नहीं है।

दूसरे अभ्यास में मानें कि एक्सचेंज ने ऑर्डर स्वीकार कर लिया, लेकिन उसका जवाब नहीं पहुँचा। सही अगला कदम पहचान संख्या से स्थिति खोजना और खाते की गतिविधि मिलाना है; वही ऑर्डर तुरंत फिर भेजना नहीं। रिकॉर्ड में समय, माँगा गया ऑर्डर, पहचान संख्या, पूरी मात्रा, औसत कीमत, फीस और अंतिम स्थिति रखें। API key या कोई सीक्रेट इस रिकॉर्ड में न डालें।

ये अभ्यास नियम और प्रक्रिया की जाँच करते हैं, लाइव तरलता या भविष्य के नतीजे साबित नहीं करते। SharkRule के वर्तमान समर्थित एक्सचेंज और सुविधाएँ अलग से देखें। इस गाइड में किसी विकल्प का वर्णन उसका SharkRule में उपलब्ध होने का दावा नहीं है। पात्रता आपके स्थान, खाते और एक्सचेंज के संबंधित उत्पाद की शर्तों पर निर्भर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मार्केट ऑर्डर स्क्रीन पर दिख रहे भाव पर पूरा हो जाता है?

ज़रूरी नहीं। निष्पादन के समय उपलब्ध अलग-अलग प्रस्तावों से मात्रा मिल सकती है। एक्सचेंज की सुरक्षा सीमाएँ और ट्रेडिंग स्थिति भी असर डाल सकती हैं।

कीमत लिमिट तक आई, फिर भी ऑर्डर अधूरा क्यों रहा?

दिखी कीमत पुरानी हो सकती है, उस दर पर मात्रा कम हो सकती है या दूसरा ऑर्डर पहले पूरा हो सकता है। एक्सचेंज का स्टेटस, पूरी मात्रा और वैधता जाँचें।

क्या लिमिट ऑर्डर हमेशा मेकर होता है?

नहीं। मौजूदा दूसरे ऑर्डर से तुरंत मैच होने वाला लिमिट ऑर्डर टेकर हो सकता है। फीस का फैसला वास्तविक निष्पादन और मौजूदा शुल्क नियमों से होता है।

बॉट बंद करने से खुले ऑर्डर भी कैंसल हो जाते हैं?

ऐसा मानकर न चलें। नए ऑर्डर रोकना, बाकी मात्रा कैंसल करना और पहले से पूरी ट्रेड जाँचना अलग काम हैं।

आधिकारिक दस्तावेज़ और स्रोत

लिंक किए गए आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर AI की सहायता से तैयार किया गया। उदाहरण काल्पनिक हैं; वास्तविक खातों पर परीक्षण या रिटर्न की तुलना नहीं की गई है।